छत्तीसगढ़ - नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत के बयान पर भड़के जगद्गुरु रामभद्राचार्य, डॉ महंत को दी यह बड़ी चुनौती
मनेन्द्रगढ़ 28 मई 2026 - चिरमिरी में श्रीराम कथा कहने आए जगद्गुरु रामभद्राचार्य को लेकर नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत के दिए बयान ने नया मोड़ ले लिया है। व्यासपीठ पर विराजमान जगद्गुरु रामभद्राचार्य अपने कथा से भक्ति की बयार बहा रहे थे कि एकाएक मनेंद्रगढ़ पहुंचे नेता प्रतिपक्ष डॉ महंत ने उनके बारे में मीडिया में बयान देकर विवाद की स्थिति पैदा कर दी है। अब इस पर रामभद्राचार्य ने अपनी कथा के आखिरी दिन बहुत ही संयमित तरीके से, मगर काफी तीखा जवाब महंत को दिया है।
विवाद तब शुरू हुआ जब मनेन्द्रगढ़ विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर आए नेता प्रतिपक्ष डॉ महंत ने पत्रकारों के सवाल के जवाब में कह दिया कि वे चिरमिरी में जगद्गुरु रामभद्राचार्य की कथा सुनने नहीं जाएंगे। डॉ महंत ने आगे यहां तक कह दिया कि वे उन्हें जगतगुरु नहीं मानते। फिर यह भी कहा कि जिस तरह से वे भाजपा का पक्ष लेते हैं, उस हिसाब से वे भाजपा के प्रचारक हैं। महंत का बयान सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कथा के अंतिम दिन व्यासपीठ से ही बहुत ही तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मैं सब कुछ सहन कर सकता हूं, लेकिन कोई उनके जगद्गुरुत्व को चुनौती देगा तो वह स्वीकार नहीं किया जा सकता।
रामभद्राचार्य ने सीधे कहा, चरणदास महंत को मेरी खुली चुनौती है। मेरे जगद्गुरुत्व का पूर्ण परीक्षण कर लें, जगतगुरु होने के लिए तीन ग्रंथों पर भाष्य लिखना अनिवार्य होता है, मैं सभी कसौटियों पर खरा हूं। सभी अखाड़ों ने मेरे जगद्गुरुत्व को स्वीकार किया है। जो रामजी से प्रेम करेगा, उसे मेरा आशीर्वाद मिलेगा। रामभक्तों पर लाठियां ही नहीं, गोलियां तक चलवाई गई थीं, क्या वह दिन भूल गए , हम राम जन्मभूमि आंदोलन के लिए महीनों जेल में रहे, आपने क्या किया? देश का विभाजन करवाने वालों को आज संतों पर बोलने का अधिकार नहीं। अजीत जोगी कुछ अच्छे थे, लेकिन उसके बाद क्या हुआ मैं क्या बताऊं, इतनी भी सामान्य ज्ञान नहीं कि संतों के बारे में कैसे बोला जाता है। मैं ऐसा- वैसा जगद्गुरु नहीं हूं, 22 भाषाओं में धारा प्रवाह बोल सकता हूं।
जब जगतगुरु रामभद्राचार्य ने महंत को जवाब देना शुरू किया, तब भक्त लगातार तालियों से उनका समर्थन करते रहे। पूरा जवाब देने के बाद ही रामभद्राचार्य ने आखिरी दिन की कथा का व्याख्यान शुरू किया। आखिरी दिन आयोजन समिति के संरक्षक और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल आरती में शामिल हुए। उन्होंने जगद्गुरु से आशीर्वाद लेकर प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि नौ दिवसीय श्रीराम कथा ने केवल धार्मिक वातावरण ही निर्मित नहीं किया, बल्कि सांस्कृतिक एकता, राष्ट्रप्रेम और आध्यात्मिक चेतना का भी संदेश दिया।















