सक्ती 07 अगस्त 2026 - कुछ पव्वा शराब को जप्त कर या फिर छोटी मोटी चोरियों का खुलासा कर वाहवाही लूटने वाले सक्ती पुलिस का एक घिनौना चेहरा सामने आया है। अगर बात किसी रसूखदार पर कार्यवाही करने की आये तो श्रीमान थाना प्रभारी महोदय जी के हाथों में मेहंदी लग जाती है। ऐसे कई उदाहरण है जो लगभग पिछले 08 महीने से सक्ती थाने में देखने को मिल रहा है।
ये सब ऐसे मामले है जिसमे थाना प्रभारी महोदय को निजी राजस्व की प्राप्ति होती है। लेकिन अगर कोई ऐसा मामला हो जिसमें थाना प्रभारी महोदय को निजी राजस्व की प्राप्ति की संभावना ना दिखती हो तो उस मामले में FIR दर्ज करना तो दूर शिकायत करने में आपकी चप्पलें घिस जाएगी लेकिन FIR होना तो दूर शिकायत भी नही ली जाएगी। ये मामला तब और गंभीर हो जाता है जब मुद्दा महिला उत्पीड़न से जुड़ा हो।
ताजा मामला सक्ती की एक नवविवाहिता पीड़िता से जुड़ा है जिसकी शादी 20 अप्रेल 2026 को हुई थी लेकिन दहेज और मानसिक प्रताड़ना के बाद वह लगभग एक महीने के बाद 25 मई को वापस मायके आ गई। जिसके बाद पीड़िता ने 29 मई को सक्ती थाना प्रभारी लखन पटेल के समक्ष पेश होकर पति और ससुरालियों पर मामला दर्ज करने के संबंध में लिखित आवेदन पेश की।
इस आवेदन पर 27 जून को सक्ती के परिवार परामर्श केंद्र में हुई काउंसलिंग के बाद थाने जाने की सलाह दी गई। आज 27 जून को बीते 41 दिन हो गए लेकिन सक्ती थाना प्रभारी श्री लखन पटेल जी इस प्रकरण को अपनी कुर्शी के पीछे दबा कर बैठे है। अब इसके पीछे सक्ती TI लखन पटेल जी की क्या मंशा है ये तो वही जाने लेकिन लोग कहने लगे है कि बिना भोग के भगवान खुश नही होते और बिना चढ़ावे के?? खुश नही होते।
बता दे कि ये मामला सक्ती के वरिष्ठ पत्रकार से जुड़ा हुआ है ऐसे में आप खुद अंदाजा लगा सकते है कि जब एक वरिष्ठ पत्रकार को महिला संबंधी अपराध की शिकायत दर्ज कराने में जब इतनी परेशानी उठानी पड़ रही है तो "लखन युग" मे आम लोगो को कितनी परेशानी उठानी पड़ रही होगी।









