दो साल की मासूम गिरी खुले बोरवेल में , सौ फीट की गहराई पर है फंसी , रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
देश , 16-09-2022 6:58:40 AM
दौसा 15 सितंबर 2022 - राजस्थान में बांदीकुई (दौसा) के आभानेरी के पास 2 साल की बच्ची 200 फीट गहरे बोरवेल में गिर गई। घटना सुबह 11 बजे की है। सूचना मिलते ही प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई है और बच्ची को निकालने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। मासूम 100 फीट की गहराई पर नजर आ रही है। बच्ची को बचाने के लिए बाेरवेल के बगल में 100 फीट गहरा गड्ढा खोदा जा रहा है। अब तक 40 फीट तक गड्ढा खोदा जा चुका है। रस्सी से बांध कर पानी की बोतल बच्ची तक पहुंचाई गई है। पानी पीने के लिए बोतल पर निप्पल भी लगी हुई है।
कैमरे में बच्ची बोतल लिए दिख रही है। दरअसल, गांव में देवनारायण गुर्जर की बेटी अंकिता सुबह अपने घर के बाहर खेल रही थी। घर के पास ही एक ओपन बोरवेल है। वह खेलते हुए अचानक गिर गई। कुछ देर तक जब बच्ची नहीं दिखी तो घर वालों ने उसकी तलाश की। इसी बीच बोरवेल से उसके रोने की आवाज आई। रोने की आवाज सुनकर घर वालों के हाथ पांव फूल गए। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना प्रशासन को दी। SDRF की टीम चला रही है रेस्क्यू ऑपरेशन थोड़ी देर के लिए तेज बारिश की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना पड़ा था, लेकिन अब एसडीआरएफ की टीम भी बच्ची को बचाने के लिए पहुंच गई है। बच्ची के मूवमेंट पर नजर रखने के लिए CCTV कैमरा बोरवेल में डाला गया है। कैमरा दिखते ही बच्ची ने उसे पकड़ने की भी कोशिश की। इधर, जैसे ही मां को पता चला तो वह भी उसे देखने मौके पर पहुंच गई। रेस्क्यू टीम ने बताया कि बच्ची मूवमेंट कर रही है और कैमरे को पकड़ने की भी कोशिश की।
मासूम को बोरवेल से निकालने में जुटी एसडीआरएफ की टीम अब देसी जुगाड़ से उसे सुरक्षित निकालने में जुटी है। यह देशी जुगाड़ जालोर जिले के बागोड़ा क्षेत्र के रहने वाले मादाराम की तकनीक पर बनाया जा रहा है। मादाराम इससे पूर्व सात बार बोरवेल में फंसे मासूमों को निकाल चुके हैं। ऐसे बनाया जा रहा जुगाड़ देशी जुगाड़ के लिए बराबर लंबाई के तीन पाइप लिए जाते हैं। इन तीनों पाइप को बांधा जाता है और लास्ट में एक टी-बनाते हैं। इस पर एक जाल बांधा जाता है। यह सभी एक मास्टर रस्सी से जुड़ी रहती है। इस पर कैमरा भी जोड़ा जाता है। इससे पता चलता है कि बच्चा जुगाड़ में फंसा या नहीं। मास्टर रस्सी का कंट्रोल बाहर खड़े युवक के पास रहता है। इस पूरे स्ट्रक्चर को बोरवेल में उतारा जाता है। जैसे ही यह स्ट्रक्चर बच्चे पर जाता है। तो उस मास्टर रस्सी को बाहर से खींचा जाता है, जिससे बच्चा उसमें फंस जाए। जैसे ही बच्चा उसमें फंसता है, बच्चे को बाहर खींच लिया जाता है।
अंकिता के दादा कमल सिंह (65) ने बताया, 'ये बोरवेल दो साल पहले खोदा गया था, लेकिन वो सूखा निकला। तब इस बोरवेल को ढक्कन लगाकर छोड़ दिया गया। आज सुबह ही मैंने बोरवेल में मिट्टी भरने के लिए ढक्कन खोला था। करीब 11 बजे तक बोरवेल में 100 फीट तक मिट्टी भी भर दी थी। उसके बाद मैं कमरे में थोड़ा आराम करने चला गया और पीछे से अंकिता खेलते हुए बोरवेल के पास पहुंची और गिर गई।' बता दें कि बोरवेल घर के चबूतरे पर ही था।
















