छत्तीसगढ़ के इस शहर में 13 साल से छिपा था झारखंड का कुख्यात गैंगस्टर, खड़ी कर ली थी करोड़ो की संपत्ति..
अंबिकापुर 07 जुलाई 2026 - झारखंड के वासेपुर का कुख्यात गैंगस्टर शब्बीर आलम (60) पिछले 13 साल से अपने सहयोगी जावेद के साथ अंबिकापुर में छिपकर रह रहा था। इस दौरान उसने एक स्थानीय बस संचालक के साथ पार्टनरशिप कर बसों और 40 से ज्यादा एम्बुलेंस का कारोबार खड़ा किया। करोड़ों रुपए का नेटवर्क बनाने के साथ उसने अंबिकापुर में आलीशान मकान भी बनवा लिया।
दोहरे हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा पा चुका शब्बीर आलम धनबाद पुलिस द्वारा घोषित भगोड़ा है। उसकी तलाश में तीन दिन पहले झारखंड पुलिस अंबिकापुर पहुंची थी, लेकिन छापे से पहले ही वह अपने साथी के साथ फरार हो गया। मामले में सरगुजा पुलिस ने सोमवार को गैंगस्टर के सहयोगी और उसके कारोबारी पार्टनर बस संचालक बैदुल खान (57) के खिलाफ कोतवाली थाने में FIR दर्ज की है।
आरोप है कि बैदुल खान ने शब्बीर के भगोड़ा होने की जानकारी होने के बावजूद उसे पनाह दी और कारोबार में साथ दिया। अब पुलिस गैंगस्टर शब्बीर आलम के आर्थिक नेटवर्क, संपत्तियों और उसे संरक्षण देने वाले लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
बता दें कि वासेपुर के खूनी गैंगवार पर आधारित फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' भी बन चुकी है। वासेपुर (धनबाद) के गैंगस्टर शब्बीर आलम, उसके भाई शाहीद आलम ने 5 लोगों के साथ मिलकर डॉन फहीम खान की मां नजमा खातून और मौसी शहनाज खातून को 18 अक्टूबर 2001 को धनबाद में गोली मार दी थी। हत्या के आरोप में आरोपी गिरफ्तार भी किए गए थे। 2013 में हाईकोर्ट में पेशी के दौरान गैंगस्टर शब्बीर आलम भाग गया था। वह अपने साथी जावेद के साथ अंबिकापुर के बस संचालक बैदुल खान के संपर्क में आया। बैदुल खान ने गैंगस्टर को पनाह देने के साथ ही अपने साथ बस संचालन में पार्टनर भी बनाया।
सरगुजा SSP राजेश अग्रवाल ने बताया कि, मामले में कोतवाली पुलिस ने बैदुल खान के खिलाफ FIR दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। और अंबिकापुर में छिपे आरोपी शब्बीर आलम की तलाश में झारखंड पुलिस पहुंची थी, लेकिन वह फरार होने में कामयाब रहा। अभी तक वह पकड़ा नहीं गया है।
















