सक्ती के माँ महामाया मंदिर में लगती है चुनरी और नारियल बोली, आखिर किसके पास जाता है पैसा??
सक्ती 26 मार्च 2026 - सक्ती की आदिशक्ति माँ महामाया आज सिर्फ नगर ही नही बल्कि पूरे जिले के आस्था का केंद्र है। दूर दूर से लोग अपनी मनोकामना लेकर महामाई दाई के दरबार मे पंहुचते है और भक्तों की संख्या नवरात्रि पर्व के दौरान इतनी बढ़ जाती है कि उन्हें संभालना मुश्किल हो जाता है।
नवरात्रि पर्व पर श्रद्धालु माता को चूड़ी, चुनरी, फल और नारियल चढ़ाते है लेकिन बदले में उन्हें प्रशाद के रूप में क्या मिलता है. दुत्कार और प्रशाद के नाम पर दो टुकड़ा नारियल और चना। माँ महामाई के भक्त इस उम्मीद में फल, नारियल, चुनरी और प्रशाद चढ़ाते है की उसका आधा हिस्सा माँ को अर्पित किया जाएगा और आधा हिस्सा उन्हें प्रशाद के रूप में दिया जाएगा जिन्हें वे अपने परिजनों और शुभचिंतकों को वितरित कर पुण्य के भागी बनेंगे।
लेकिन माता को फल, नारियल, चुनरी, सिंदूर, चूड़ी और प्रशाद चढ़ाने वालो को क्या पता कि उनके द्वारा चढ़ाए गए फल, नारियल, चुनरी और प्रशाद का सौदा तो नवरात्रि पूर्व हो चुका होता है। सूत्रों की माने तो मंदिर में चढ़ने वाले फल, नारियल, चुनरी और प्रशाद का ठेका हजारों रुपये लेकर मंदिर के मुख्य कर्ताधर्ता महल के एक नौकर द्वारा अपने किसी चहेते को दे दिया जाता है। जो रोज रात मंदिर के आसपास लगने वाले दुकानदारों को बाजार भाव से 50 पैसे से एक रुपए तक कि कीमत कम कर बेच देता है और वही फल, नारियल, चुनरी और प्रशाद सुबह फिर से बिक कर माता को चढ़ जाता है।
खास बात यह है कि इस गंदे धंधे से ना तो हल्दी लगती है और न फिटकरी और रंग भी चोखा आता है और पूरी रकम साहेब की जेब मे चली जाती है जिससे वो अपनी जरूरतें पूरी करता है। सक्ती के महामाया मंदिर में माता को लगने वाले सवामनी भोग में भी बड़ा झोलझाल है। जिसे हम अगले एपिसोड में आपको बताएंगे।
क्षमा याचना..
सक्ती के महामाया मंदिर से जुड़ी इस खबर को लिखने का उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पंहुचना नही बल्कि उस भ्रष्टाचार को उजागर करना है जो धर्म के आड़ में लोगो के आस्था के साथ किया जा रहा है। खुलासा अभी जारी रहेगा..।

















