सक्ती का माँ महामाया मंदिर आस्था का केंद्र या कमाई का जरिया, पढ़े एक एक पाई का हिसाब जिसे आप चढ़ावा समझते है..
सक्ती 24 मार्च 2026 - सक्ती के प्रमुख आस्था का केन्द्र माँ महामाया मंदिर में भ्रष्टाचार का खेल इतने चरम सीमा में है कि कोई इस खेल को जानकर एक तरह से सदमे में आ जाएंगे। और ये पुरा खेल आस्था के नाम पर लोगों के आँखों मे धूल झोंक कर खेला जा रहा है। मामला ज्योति कलश से जुड़ा हुआ है।
कल की खबर में हम बताए थे कि चंद्रपुर , अड़भार और रतनपुर में ज्योति कलश प्रज्ज्वलित करने की राशि 701 से 751 रुपए है तो सक्ती के माँ महामाया मंदिर 1001 रुपये क्यो वसूला जा रहा है। अगर राशि के अंतर की बात करे तो वह महज 300 रुपये है लेकिन इसे बल्क (थोक) में जोड़े तो यह राशि लाखो में पँहुच जाती है। अब सवाल यह है कि आखिर यह राशि जाती कंहा है। पहले समझे हिसाब..
इस चैत्र नवरात्रि में सक्ती के माँ महामाया मंदिर में लगभग 2500 तेल ज्योति कलश प्रज्वलित है तो 2500 x 1001 = 2502500 यानी 25 लाख 02 हजार 05 सौ रुपए होती है। अगर इसमें सभी खर्च काट दे तो लगभग 10 से 12 लाख तक बचत होता है ( डिटेल हिसाब अगले एपिसोड में दिया जाएगा ) तो बाकी की रकम जाती कंहा है और उसका उपयोग किस कार्य मे किया जाता है क्योंकि माँ महामाया मन्दिर में शेड बनाने से लेकर मरम्मत कार्य सक्ती शहर के सम्मानीय दानदाताओं के द्वारा कराया जाता है।
ये तो बात थी सिर्फ ज्योति कलश से होने वाले आमदनी की तो जनाब अगर बात करे दानपेटी से निकली राशि का, नारियल, चढ़ावा, सवामनी, चुनरी, अगरबत्ती, फूल माला से होने वाले कमाई की तो रकम 20 लाख से ऊपर जाएगा। क्योंकि यहाँ सबकी लगती है बोली..।
अभी तो बहुत खुलासा होना है अगर खबर बुरा लगे तो गालियां दे सकते है और अच्छी लगे तो सपोर्ट करे क्योंकि ये लड़ाई आप लोगो के आस्था से जुड़ी है।.

















