सक्ती का माँ महामाया मंदिर कुछ लोगो के लिए बना कमाई का अड्डा, ज्योति कलश के नाम पर की जा रही है लूट..
सक्ती 23 मार्च 2026 - "सक्ती का माँ महामाया मंदिर बना कमाई का अड्डा" खबर का यह शीर्षक देख कर आप हमें नास्तिक समझ सकते है या फिर गाली भी दे सकते है और कोई बड़ी बात नही की घर पर हमला या फिर थाने में FIR भी दर्ज करा सकते है क्योंकि हमारी यह खबर कुछ लोगो के सीने में कील की तरह चुभेगी।
बीते रविवार को हमने अपनी वेबसाइट पर " माँ महामाया मंदिर का भंडारा बना मजाक, दान के पैसों से बेच रहे है माँ महामाई का प्रसाद" शीर्षक से एक खबर प्रकाशित की थी जिसमे टोकन के जरिये भंडारा प्रशाद बेचने संबंधी मामले का खुलासा किया था।
आज बात करते है सक्ती के माँ महामाया मंदिर में जलने वाले ज्योति कलश के बारे में.. तो शुरुआत करते है रतनपुर से तो रतनपुर के माँ महामाया देवी मंदिर में जलने वाले ज्योति कलश की तय राशि इस नवरात्रि में 701/- रुपये है। इसी तरह चंद्रपुर के माँ चंद्रसेनी में इस साल प्रज्ज्वलित हुए ज्योति कलश की तय राशि 751/- रुपये है और अड़भार में माँ अष्टभुजी मंदिर में इस साल प्रज्ज्वलित हुए ज्योति कलश की तय राशि 701/- रुपये है लेकिन सक्ती के माँ महामाया मंदिर में प्रज्ज्वलित हुए ज्योति कलश की राशि 1001/- रुपये है।
अब ऐसे में यह सवाल पैदा होता है कि बाकी सभी मंदिरों में तेल ज्योति कलश की राशि 701/- और 751/- रुपये है तो सक्ती के माँ महामाया मंदिर में तेल ज्योति कलश की राशि 1001 रुपये क्यो है। क्या इस मंदिर में तेल खाड़ी के देशों से मंगाई जाती है या फिर कोई बादाम या काजू के तेल से ज्योति कलश प्रज्ज्वलित की जाती है। या फिर मामला कुछ और है।हमरी जानकारी में कुछ ऐसे लोगो का नाम है जो सक्ती में रहते हुए भी अन्य मंदिरों में ज्योति कलश प्रज्ज्वलित कराते है और इसके पीछे वजह है कीमत और कुछ लोगो की मनमानी।
सक्ती के माँ महामाया मंदिर को लेकर एक के बाद एक खुलासा होते रहेगा क्योंकि कहानी बहुत लंबी है..।

















