सट्टे के बाद अब जुए का गढ़ बनते जा रहा है सक्ती, आखिर कौन है इस खेल के पीछे??, बूझो तो जाने..
सक्ती 13 मार्च 2026 - एक समय ऐसा था कि पूरे छत्तीसगढ़ में अंक और क्रिकेट सट्टे के लिए सक्ती शहर बदनाम था। बदलते समय के साथ अब सक्ती से सट्टा तो सिमट गया लेकिन जुआ ने विकराल रूप ले लिया। सूत्रों की माने तो शहर के कुछ लोगो का पूरा ग्रुप जुए एक बड़े सिंडिकेट को ऑपरेट कर रहा है और यह ग्रुप रोज ठिकाने बदल बदल कर बड़ा जुए का अड्डा संचालित कर रहा है।
इस जुए के अड्डे में सक्ती ही नही बल्कि आसपास के सरहदी जिले जैसे जांजगीर-चाम्पा, कोरबा, रायगढ़, बिलासपुर से भारी संख्या में जुआरी चार पहिया वाहनों में लाखो रुपये लेकर दांव लगाने पँहुच रहे है।बताया जा रहा कि जुए का यह फड़ बोरदा , देवरी गांव के बाहरी इलाके में संचालित किया जा रहा है।
खबर तो यह भी है कि इस जुए के अड्डे से प्रतिदिन नाल के रूप में लाखों रुपयों की वसूली की जा रही है। यही नही इस जुए के अड्डे में दिहाड़ी पर काम करने वाले लोग भी रखे गए है जिनका काम जुआ खेलने आये बाहरी जुआरियो को जुए के अड्डे तक पंहुचना और पुलिस पर नजर रखना है।
अगर सूत्रों की माने तो इन दिहाड़ी लोगो के पास चाकू और कत्ता, कटर जैसे घातक हथियार भी रहता है जिसे वे समय आने पर चलाने में जरा भी परहेज नही करते है। अगर सूत्रों पर यकीन करें तो दिहाड़ी पर काम करने वाले लोगो का पुलिस में अच्छा खासा आपराधिक रिकॉर्ड भी है।
गांव में चल रहे इस जुए के अड्डे से ना सिर्फ गांव का माहौल खराब हो रहा है बल्कि युवा पीढ़ी भी इस सामाजिक बुराई की चपेट में आ कर अपना भविष्य बर्बाद कर रहा है। ऐसे में इस पर तत्काल रोक नही लगाई गई तो वो दिन दूर नही जब छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती की तरह सक्ती में चल रहे जुए के अड्डे को लेकर प्रदेश स्तर में बवाल खड़ा हो जाय।
















