CGPSC घोटाले को लेकर CBI ने किया बड़ा खुलासा, जंगल के एक रिसॉर्ट में किया गया था पूरा खेला
रायपुर 06 जनवरी 2026 - राजधानी से लगभग 125 किलोमीटर दूर बारनवापारा के घने जंगलों में CGPSC भर्ती घोटाले की साजिश रची गई थी। CBI की अंतिम चार्जशीट में इस बात का खुलासा हुआ है कि आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सोनवानी ने 35 चयनित अभ्यर्थियों को बारनवापारा जंगल के एक रिसार्ट में ठहराकर परीक्षा की विशेष तैयारी कराई। कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर ने इसमें सहयोग किया।
इसी रिसार्ट के एक कमरे में प्रश्नपत्र लीक करने और चयन सूची तैयार करने की योजना बनाई गई और उच्च अधिकारियों, नेताओं और प्रभावशाली परिवारों से जुड़े अभ्यर्थियों का चयन किया गया। भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में CGPSC 2021 की परीक्षा 26 से 29 जुलाई को हुई थी। चार्जशीट में दावा किया गया है कि बारनवापारा के रिसार्ट में 11 से 24 मई 2022 के बीच 35 परीक्षार्थियों को ठहराया गया था। ये सभी कारोबारी, नेताओं और प्रभावशाली परिवारों से जुड़े थे। इनकी बुकिंग राहुल हरपाल ने की थी।
अभ्यर्थियों को राज्य सेवा परीक्षा का असली प्रश्न पत्र दिया गया और उन्हें कमरों में ही परीक्षा हल करने की व्यवस्था की गई। आरोपितों ने परीक्षा से लेकर चयन तक की प्रक्रिया के कई राज CBI के सामने उजागर किए हैं। विकास और उत्कर्ष चंद्राकर ने CGPSC मेंस का प्रश्नपत्र साल्वर को दिया। चार्जशीट में यह भी स्पष्ट हुआ कि पीएससी में चयन के लिए पद के अनुसार भारी-भरकम रेट तय थे, जैसे डिप्टी कलेक्टर बनने के लिए एक करोड़ रुपये।
गौरतलब है कि CGPSC 2021 की मुख्य परीक्षा 26 से 29 जुलाई 2022 के बीच तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में आयोजित की गई थी। CBI का कहना है कि इस घोटाले में कई उच्च पदस्थ अधिकारी, नेता और प्रभावशाली लोग अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हो सकते हैं, जिनकी भूमिका की जांच जारी है।

















