पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पं. धीरेंद्र शास्त्री के बीच जुबानी जंग तेज, एक दूसरे पर लगा रहे है आरोपो की झड़ी
रायपुर 27 दिसम्बर 2025 - छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। प्रसिद्ध कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के उस बयान के बाद विवाद खड़ा हो गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को विदेश चले जाना चाहिए। इस टिप्पणी पर भूपेश बघेल ने तीखा पलटवार करते हुए धीरेन्द शास्त्री पर कई सवाल खड़े किए।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री छत्तीसगढ़ में पैसा बटोरने आते हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि वे हनुमान चालीसा तब से पढ़ रहे हैं जब धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का जन्म भी नहीं हुआ था। भूपेश बघेल ने शास्त्री को “कल का बच्चा” बताते हुए आरोप लगाया कि वे बीजेपी के एजेंट के रूप में काम करते हैं। भूपेश बघेल ने खुली चुनौती देते हुए कहा कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री छत्तीसगढ़ के किसी भी साधु-संत से शास्त्रार्थ कर लें।
उन्होंने सवाल किया कि अगर लोग “दिव्य दरबार” से ही ठीक हो रहे हैं, तो फिर मेडिकल कॉलेज खोलने की जरूरत क्यों पड़ रही है। भूपेश बघेल ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती पर कबीर और गुरु घासीदास की वाणी गूंजती है, और यहां सनातन परंपरा की अपनी अलग पहचान है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शास्त्री से उनका बेटा भी 10 साल बड़ा है, ऐसे में वे उन्हें सनातन धर्म सिखाने की कोशिश न करें। साथ ही यह भी जोड़ा कि दूसरे प्रदेश में होते तो शायद ऐसी भाषा में बोल भी नहीं पाते।
इस बयान पर बीजेपी नेता संजय श्रीवास्तव ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल के बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि उन्हें अब सनातन धर्म पर विश्वास नहीं रहा। संजय श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े व्यक्ति पर इस तरह का कटाक्ष करना विकृत मानसिकता को दर्शाता है। उनका कहना है कि भूपेश बघेल के लिए कांग्रेस प्राथमिकता है, सनातन धर्म नहीं।
बीजेपी नेता ने यह भी कहा कि किसी कथा वाचक को “बच्चा” कहकर अपमानित करना केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ और सनातन धर्म का अपमान है। उन्होंने मांग की कि भूपेश बघेल को इस बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। फिलहाल, इस पूरे मामले ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में धार्मिक और वैचारिक बहस को और तेज कर दिया है, जहां एक ओर बयान को अभिव्यक्ति की आज़ादी बताया जा रहा है, तो दूसरी ओर इसे आस्था पर चोट माना जा रहा है।

















