सक्ती - मददगार को कड़ी टक्कर देने देवांगन समाज मे है एक से एक धुरंधर , लेकिन..
सक्ती 19 जनवरी 2025 - नगरीय निकाय चुनाव की उलटी गिनती शुरू हो गई है और आज या कल में आचार संहिता लागू होने की पूरी संभावना है ऐसे में अभी से दावेदार खुद को बेहतर साबित करने के लिए चौक चौराहों में अबकी बार,, लिखा हुआ होर्डिंग्स लगवाने लगे है। लेकिन देवांगन समाज की खामोशी आने वाले बदलाव का संकेत दे रहे है।
देवांगन समाज मे कई ऐसे बड़े-बड़े धुरंधर है जो अगर चाहे तो मददगार को मदद मांगने पर विवश कर सकते है लेकिन देवांगन समाज मे एकता की कमी के चलते आज तक इस समाज का कोई ब्यक्ति पालिका अध्यक्ष की कुर्शी पर काबिज नही हो पाया है।
अगर बात करे 2014 के पालिका के चुनाव की तो इस चुनाव में टिकट नही मिलने से नाराज होकर डॉ पीआर देवांगन ने नल छाप से निर्दलीय चुनाव लड़ा था। डॉ देवांगन समाज के प्रतिष्ठित नागरिक होने के साथ सक्ती हॉस्पिटल में बतौर सर्जन अपनी सेवाएं दे चुके थे लिहाजा यह लगने लगा था कि डॉ पीआर देवांगन बाजी मार लेंगे लेकिन वे अपनी जमानत तक नही बचा पाए। धरम देवांगन ने भी कई बार कोशिश की लेकिन उन्हें भी मुंह की खानी पड़ी।
इन सबके पीछे एक ही वजह है और वो है एकता की कमी। सक्ती पालिका क्षेत्र में सबसे बड़ी आबादी देवांगन समाज की है इसके बावजूद भी यह समाज कुर्शी की दौड़ में पीछे ही रह जाता है। विगत कुछ सालों से देवांगन समाज के युवाओं में काफी एकता देखने की मिल रही है। चाहे वो माता परमेश्वरी की शोभा यात्रा हो या फिर कोरोना काल मे मदद करने की बात हो देवांगन समाज के युवा एकजुटता दिखाते हुए समाजसेवा कार्य मे बढ़ चढ़ कर सहभागिता निभा रहे है।
अगर देवांगन समाज के युवा इसी तरह से एकता के साथ पालिका का चुनाव लड़े तो सिर्फ समाज के ही वोट से चुनाव जीत कर पालिकाध्यक्ष की कुर्शी पर काबिज हो सकते है।

















