छत्तीसगढ़ - ना 15 से 20 घंटे पढ़ाई की और ना शोसल मीडिया से दूरी बनाई फिर भी बने CGPSC के टॉपर
रायपुर , 29-11-2024 6:35:47 AM
रायपुर 29 नवम्बर 2024 - कौन कहता है टॉपर 15 से 20 घंटे की पढ़ाई के बाद ही बना जा सकता है? कौन कहता है कि PSC की तैयारी के लिए मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर रहना पड़ता है? कौन कहता है डिप्टी कलेक्टर बनने के लिए आपको दिल्ली जाकर कोचिंग करनी पड़ती है? अगर ये बातें ही सही होती, तो आज रविशंकर वर्मा टॉपर थोड़े ना बन पाते। रविशंकर वर्मा ने टॉपर तक का सफर अपने 5वें प्रयास में पूरा किया और वो भी पूरे 9 घंटे की सरकारी ड्यूटी करते हुए।
ड्यूटी के बाद जो वक्त मिलता था, उतनी ही पढ़ाई के साथ, टॉपर बन जाना आसान नहीं होता, लेकिन रविशंकर वर्मा ने ये नामुकीन, को मुमकीन बना डाला। मिडिया से बात करते हुए रविशंकर वर्मा कहते हैं कि उन्हें कामयाबी तो मिलनी थी, ये विश्वास था, लेकिन कामयाबी उन्हें टॉपर बना देगी, ये तो बिल्कुल नहीं सोचा था। वो कहते हैं, ऐसे भी परीक्षा कोई टॉपर बनने की सोच के साथ दी नहीं जाती।
बलौदाबाजार के छोटे से गांव कुसमुंडी के रहने वाले रविशंकर वर्मा अभी रोजगार अधिकारी हैं। 2021 की पीएससी में उन्हें 50वीं रैंक मिली थी, जिसके बाद उनका डिप्टी कलेक्टर बनने का सपना काफी पीछे छूट गया था, लेकिन डिप्टी कलेक्टर के सपने के साथ ही वो आगे बढ़ते रहे। रोजगार अधिकारी बनने का बाद भी उन्होंने अपने डिप्टी कलेक्टर बनने के सपने को टूटने नहीं दिया। जब आज देर शाम रिजल्ट जारी किया गया, तो रविशंकर वर्मा विभागीय ट्रेनिंग में निमोरा (रायपुर) में मौजूद थे।
रविशंकर वर्मा के पिता किसान और मां गृहणी है। ये पूछे जाने पर, कि पीएससी परीक्षा के दौरान अभ्यर्थी को 15 से 20 घंटे पढ़ाई करनी पड़ती है, आप कितने घंटे पढ़ाई करते थे? जवाब में वो कहते हैं, कि ड्यूटी के बाद जितना समय मिल पाता था, वो पढ़ाई करते थे। मेरा फोकस पूरी तरह से पढ़ाई पर था। वैसे भी आपका कांसेप्ट अगर क्लियर हो, तो कम समय में भी ज्यादा बेहतर तैयारी की जा सकती है। रविशंकर वर्मा कहते हैं कि इंटरव्यू उनका काफी अच्छा रहा था। साक्षात्कार में सारे सवाल सबजेक्ट के आधार पर थे। कुछ हॉबी पर सवाल थे। मेरा हॉबी क्रिकेट था, इसलिए क्रिकेट से जुड़े कुछ सवाल पूछे गये।
ये पूछे जाने पर क्या आपने भी दूसरे अभ्यर्थी की तरह सोशल मीडिया और इंटरनेट से खुद को दूर कर लिया था? जवाब में रविशंकर ने कहा कि उन्होंने पूरी तरह से सोशल मीडिया को बंद नहीं किया, उनका काम भी ऐसा था, कि पूरी तरह से मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर हुआ नहीं जा सकता था। लेकिन जरूर लिमिट में ही इस्तेमाल करता था।
रविशंकर वर्मा ने इलेक्ट्रानिक्स ब्रांच में बीटेक किया है। एनआईटी पास करने के बाद उन्होंने जॉब किया, लेकिन उनका मन सिविल सर्विस में जाने का था। लिहाजा, प्राइवेट जॉब छोड़कर वो पीएससी की तैयारी में जुट गये। 2021 में उन्हें पीएसी में कामयाबी मिली, लेकिन उनका सपना पूरा नहीं हुआ। वो रोजगार अधिकारी बने। वो फिलहाल कोरिया में पदस्थ थे। अब रोजगार अधिकारी से वो डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित हो गये हैं।
















