बरेली 07 अक्टूबर 2026 - सोशल मीडिया पर आय दिन दिन ऐसे विज्ञापन आते रहते हैं जिसमे दावा किया जाता है कि महज कुछ रूपए में आपकी ‘सेक्स पावर’ बढ़ जाएगी. लेकिन सारे दावे फर्जी निकलते हैं. ऐसा ही ठगी का मामला उत्तरप्रदेश के बरेली से सामने आया है. आरोपी खुद को बड़ा डॉक्टर बताते थे, बड़ी - बड़ी बातें करते थे और फिर ऑनलाइन नकली यौन वर्धक दवाएं बेचकर लोगों से पैसे ऐंठते थे. पुलिस ने फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर दो ठगों को गिरफ्तार किया है।
पूरा मामला जिले के इज्जतनगर पुलिस थाना इलाके का है. पुलिस ने देवरनियां निवासी समीरउद्दीन (24 साल) और बड़ी बिहार के रहने वाले यूसुफ (25 साल) को गिरफ्तार किया है. जबकि तीसरा आरोपी यूसुफ का भाई इलियास फरार हो गया है।
जानकारी के मुताबिक़, पुलिस को सूचना मिली थी कि राजीव एन्क्लेव के मकान में कॉल सेंटर के आड़ में ऑनलाइन नकली सेक्स पावर बढ़ाने की दवा बेचीं जाती थी. जिसके बाद पुलिस ने छापा मारा और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. साथ ही मौके से 6 कंप्यूटर, 8 मॉनिटर, लैपटॉप, 3 प्रिंटर, स्कैनर, 12 मोबाइल, नकली दवाओं के 85 पैकेट, पैकिंग का सामान, फर्जी मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस, 6 चेकबुक, 14 एटीएम कार्ड और 1.99 लाख रुपए कैश बरामद किये गए है।
पुलिस ने जब दोनों से पूछताछ की तो बेहद ही हैरान कर देने वाले खुलासे हुए. पुलिस के अनुसार, सभी मिलकर Instagram पर ‘Herbal and Jari Booti’ नाम से ऑनलाइन दवा की दूकान चलाते थे. ये लोग इंस्टाग्राम के जरिए लोगों से संपर्क करते थे. उन्हें पुरुषों की यौन कमजोरी दूर करने वाली दवा के बारे में बताते थे. 250 और 300 रुपये की दवा से सेक्स पावर बढ़ाने का दावा करते थे।
24 वर्षीय समीरुद्दीन जिसने कक्षा 8 तक पढ़ाई की है वो खुद को बड़ा डॉक्टर बताता था. वह फोन पर मरीजों से बात करता और ग्राहकों को भरोसा दिलाता था. जिसके बाद वह ग्राहक से ऑनलाइन ऑर्डर लेकर पैसे UPI के जरिये लेता था. दुसरा आरोपी कंप्यूटर पर ग्राहकों का डेटा संभाल रहा था, जबकि तीसरा आरोपी खाली कैप्सूल में पाउडर भरकर उन्हें पैक करने का काम था. पूछताछ में पता चला वे सस्ता पाउडर और कच्चा माल सहारनपुर और मुरादाबाद के खुले बाजारों से खरीदते थे. इसके बाद उसी सामग्री को कैप्सूल में भरकर पैक किया जाता था.
फिलहाल पुलिस इन आरोपियों से पूछताछ कर रही है. पुलिस को आशंका है इसमें और भी लोग शामिल हो सकते हैं. गिरोह में शामिल अन्य सदस्यों और कथित सप्लायरों की भूमिका की जांच की जा रही है.












