रायपुर 23 सितंबर 2023 -  CGPSC में गड़बड़ियों की जब बात आती है, तब 2003 बैच को याद  किया जाता है। न्यायिक व्यवस्था को चुनौती देकर इस बैच के कई खटराल डिप्टी कलेक्टर अब IAS बन चुके हैं। इस विवाद में तत्कालीन CGPSC चेयरमैन अशोक दरबारी सस्पेंड हुए थे, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद 2003 में गलत प्रक्रिया के तहत सलेक्ट हुए अफसर अभी भी प्रमोशन और तरक्की पा रहे हैं।


खैर, 2003 तो काफी पुरानी बात हो गई है। ताजा मसला 2021 की CGPSC भर्ती का है। इसमें छत्तीसगढ़ PSC के अध्यक्ष के करीबी रिश्तेदार , IAS , IPS और कांग्रेस नेताओं के बच्चे सलेक्ट हुए हैं और इनकी संख्या 18 है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने इसे काफी गंभीर माना है। उन्होंने कहा कि "हम ये नहीं कहते कि किसी के बच्चे सलेक्ट नहीं हो सकते, लेकिन ऐसा क्या संयोग कि PSC चेयरमैन की बेटी और करीबी रिश्तेदार सलेक्ट हुए हैं "।

ऐसे समय में एक बार फिर CGPSC 2003 की याद आती है, जब हाईकोर्ट द्वारा नियुक्ति रद्द करने के आदेश और EOW में केस दर्ज होने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई तो दूर, दागी चयनित अभ्यर्थी उल्टे IAS और IPS बनकर बैठे हैं। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ के सिविल सेवा में शामिल अभ्यर्थी हाईकोर्ट के फैसले से उत्साहित हैं, साथ ही, आशंकित भी हैं कि चीफ जस्टिस के आदेश के बाद कहीं फिर महंगे वकील खड़ा कर सभी सुप्रीम कोर्ट से स्टे ना लें और होनहार युवाओं के हक की सीट धनबल और राजनीतिक पहुंच वालों को मिल जाए।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने जिस तरह मामले में त्वरित रूप से निर्णय लेते हुए नियुक्ति पर रोक लगाने के संकेत दिए हैं, उससे युवाओं के मन में बड़ी उम्मीद जगी है, हालांकि जिन लोगों के सलेक्शन हुए हैं, उनके खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं हो सकती, क्योंकि PSC चेयरमैन का इस मामले में सीधा इन्वॉल्वमेंट दिख रहा है। बहरहाल इस मामले में 05 अक्टूबर को फिर सुनवाई होनी है।