छत्तीसगढ़ में अचानक ही नही बन गए चार नए जिले , नए जिले के गठन के पीछे सरकार की यह है मंशा
रायपुर , 17-08-2021 8:22:09 PM
रायपुर 17 अगस्त 2021 - छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रदेश वासियों को चार नए जिलों की सौगात दी है। इनमें से तीन जिले प्रदेश के उत्तरी भाग में हैं तो एक मध्य भाग के निचले हिस्से में। देश के अन्य प्रदेशों में जिलों की आबादी पर दृष्टि डालें तो प्रदेश के जिलों की आबादी बहुत कम है, परंतु जैसे ही भौगोलिक क्षेत्र का तुलनात्मक विश्लेषण किया जाता है, इस फैसले की प्रासंगिकता समझ में आने लगती है। विरल आबादी के साथ पहाड़ी व जंगली क्षेत्र प्रदेश में संसाधनों के विकास के समक्ष बड़ी चुनौती पेश करते हैं।
शासकीय दृष्टिकोण से लोगों तक पहुंच बढ़ाने के लिए जिलों का भौतिक आकार छोटा किया जाना जरूरी है। निश्चित तौर पर गोरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की स्थापना के सकारात्मक परिणाम ने भी प्रदेश सरकार को इस निर्णय तक पहुंचने के लिए उत्प्रेरित किया। मुख्यमंत्री मानते हैं कि सरकार के इस निर्णय से आम आदमी को प्रशासनिक काम कराने के लिए अधिक मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। कोरिया, रायगढ़, बलौदाबाजार और राजनांदगांव गांव का हिस्सा रहे इन नव सृजित जिलों के अंचलों की अब तक के जिला मुख्यालयों से सौ से सवा सौ किलोमीटर तक की दूरी है। 18 नई तहसीलों के गठन की घोषणा भी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मनेंद्रगढ़, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और मोहला-मानपुर जिलों के लिए घोषणा के साथ ही उम्मीद की जा रही है कि कुछ अन्य जिलों की स्थापना की मांग भी जोर पकड़ेगी।
पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह भी जिलों का आकार छोटा किए जाने के पक्ष में ही रहे हैं। राजस्व, शिक्षा, चिकित्सा से लेकर विकास और कृषि कार्यों पर नजर रखने में छोटे जिलों की महत्ता सामने आती रही है। सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष की तरफ से भी नए जिलों की वर्तमान घोषणा को समर्थन ही मिलेगा। जिलाधिकारी के माध्यम से सरकार को योजना निर्धारण और कार्यान्वयन को गति देने में आसानी होगी। मुख्यमंत्री की यह घोषणा प्रशासनिक इकाइयों के विकेंद्रीकरण की दिशा में अहम कदम है। प्रशासन समग्र रूप से जनता के पास पहुंचेगा।
उम्मीद की जानी चाहिए कि वर्तमान निर्णय से कामकाज में कसावट आने के साथ आम जनता के लिए प्रशासनिक पारदर्शिता कायम हो सकेगी, ताकि क्षेत्र के लोग विकास की मुख्यधारा में सहजता से शामिल हो सकें। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के साथ प्रदेश के जिलों की संख्या बढ़कर 33 हो चुकी है। विधानसभा अध्यक्ष डा. चरणदास महंत और कोरबा की सांसद ज्योत्सना महंत के राजनीतिक प्रभाव वाले इस क्षेत्र में तीन नए जिलों के गठन के इस फैसले के राजनीतिक निहितार्थ भी निकाले जाएंगे। इसे भारतीय जनता पार्टी के गढ़ और वोट बैंक में सेंध भी बताया जाएगा। इन सबके बावजूद कोई इस फैसले को गलत नहीं ठहरा सकता और अंतत: फायदा जनता को ही होगा। यही लोकतंत्र में जनता की ताकत है।
सोर्स - नई दुनिया















