नशे के गिरफ्त में सक्ती के युवा, गुमटी, दवाई दुकान और इलेक्ट्रॉनिक दुकानों तक मे बिक रही है नशे का सामान, पुलिस बेखबर
सक्ती 21 मई 2026 - सट्टे के बाद अब सक्ती शहर के युवा नशे की गिरफ्त में फंसते जा रहे है। शराब महंगी होने की वजह से अब युवा पीढ़ी कोरेक्स, बोनफिक्स, गांजा के अलावा नशीली दवाओं का सेवन कर अपनी नशे की लत को पूरी कर रहे है। ये सब नशे का सामान सस्ता होने के साथ आसानी से उपलब्ध होने वाले है। सभी इलेक्ट्रॉनिक दुकानों में बोनफिक्स महज 10 से 20 रुपये में आसानी से मिल जाता है। इसी तरह अगर कसेर पारा या गायत्री मंदिर के पास जाओ तो 30 से 50 रुपये में गांजा की पुड़िया मिल जाएगी।
सक्ती में कई ऐसी दवा की दुकानें है जँहा कोरेक्स और अल्प्राजोलम जैसी नशीली दवाएं कुछ ज्यादा रकम देकर आसानी से मिल जाती है। अगर नशेड़ियों के अड्डो की बात करे तो बुधवारी बाजार की पानी टँकी, गौरवपथ का पुराना शिव मंदिर, गणेश बंध तालाब के किनारे ये बिना किसी डर या भय के सूखे नशे का सेवन करते मिल जाएंगे। और दुःखद पहलू यह है यह है कि स्कूल और कॉलेज के छात्र भी इसकी चपेट में आते जा रहे हैं।
सक्ती जिले के लगभग सभी थाने की पुलिस नशा विरोधी अभियान के तहत सिर्फ कच्ची महुआ शराब विक्रेताओं पर ही कार्यवाही करती है। लेकिन सबसे ज्यादा घातक नशा बोनफिक्स को बताया जाता है। जिसे रुमाल में भर कर मुँह से खिंचने के बाद इसका नशा पूरा दिन रहता है। और यह बोनफिक्स लगभग सभी इलेक्ट्रॉनिक दुकानों आसानी से मिल जाता है। उस पर जरा भी ध्यान नही देती है।
सक्ती जिले के लोगो ने SP से यह मांग की है कि पुलिस कच्ची महुआ शराब पर ही कार्यवाही ना करे बल्कि बोनफिक्स की तरह हर उस नशे के खिलाफ अभियान चला कर कड़ी कार्यवाही करें जिससे नशे के कारोबार में रोक लगने के साथ युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त से दूर रहे।
















