छत्तीसगढ़ - फर्जी अफसर गिरफ्तार , पुलिस और बड़े कारोबारियों को बनाता था शिकार , अब तक लाखो रुपये की कर चुका है वसूली
रायपुर 04 सितम्बर 2025 - रायपुर में ड्रग पैडलर नाव्या मलिक की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच में लगातार नए-नए खुलासे हो रहे हैं। इसी कड़ी में अब एक फर्जी अफसर गैंग का पर्दाफाश हुआ है, जो खुद को क्राइम ब्रांच और EOW (आर्थिक अपराध शाखा) का अधिकारी बताकर लोगों से मोटी रकम की वसूली करता था। ताजा मामले में इस गैंग के सदस्य ने रायपुर के एक होटल कारोबारी को निशाना बनाया।
आरोपी ने खुद को क्राइम ब्रांच का अफसर बताते हुए कारोबारी से उसके छोटे भाई का मामला रफादफा करने के नाम पर 5 लाख रुपये की मांग की। पुलिस ने मौके पर दबिश देकर आरोपी को पकड़ लिया। पुलिस ने जब आरोपी की कार की तलाशी ली तो उसमें से EOW का फर्जी आईकार्ड, गंज थाने की सरकारी सील और पुलिस की सायरन लगी गाड़ी जब्त की गई। इतना ही नहीं, आरोपी के पास थाना प्रभारी के नाम से तैयार फर्जी दस्तावेज और हस्ताक्षर करने की सामग्री भी मिली।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी इन नकली दस्तावेजों और गाड़ी का इस्तेमाल कर खुद को बड़ा अफसर बताता था और लोगों को ब्लैकमेल करके रकम ऐंठता था। आरोपी की पहचान आशीष घोष उर्फ आशीष शर्मा के रूप में हुई है। आरोपी से जब क्राइम ब्रांच ने सख्ती से पूछताछ की तो उसने कई चौंकाने वाले राज उगले। उसने कबूला कि वह लंबे समय से इसी तरह फर्जी पहचान का सहारा लेकर कारोबारी, व्यापारी और यहां तक कि पुलिसकर्मियों को भी ब्लैकमेल करता आ रहा है।
पूछताछ में आरोपी ने यह भी खुलासा किया कि उसने पहले भी थाना और पुलिस अफसरों के नाम का हवाला देकर करीब 30 लाख रुपये तक की वसूली की है। वह अपने संपर्कों और नकली पहचान के दम पर लोगों को विश्वास दिलाता था कि अगर रकम नहीं दी तो उनके खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आरोपी सिर्फ आम लोगो या कारोबारियों को ही नहीं, बल्कि ASI, आरक्षक और महिला आरक्षकों तक को ब्लैकमेल करता था। वह पुलिस थाने की सील और फर्जी दस्तावेज दिखाकर उन्हें भी अपनी जालसाजी का शिकार बनाता था।
फिलहाल आरोपी आशीष घोष से क्राइम ब्रांच की टीम लगातार पूछताछ कर रही है। पुलिस का मानना है कि इस गैंग में और भी लोग शामिल हो सकते हैं, जो फिलहाल फरार हैं। जल्द ही पुलिस पूरे रैकेट का पर्दाफाश कर सकती है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के मोबाइल और दस्तावेजों की जांच से कई और हाई-प्रोफाइल नाम सामने आ सकते हैं। संभावना जताई जा रही है कि इस नेटवर्क के तार उन लोगों से भी जुड़े हो सकते हैं, जो पहले से ही नाव्या मलिक ड्रग्स केस में पुलिस की जांच के दायरे में हैं।
















