छत्तीसगढ़ - यँहा होती है भाई के साथ बहन की शादी , इंकार करने पर लगता है जुर्माना , सदियों से चल रहा है रिवाज
रायपुर , 18-09-2024 10:56:16 PM
रायपुर 18 सितंबर 2024 - हर धर्म में भाई-बहन का रिश्ता काफी पाक माना जाता है. भाई अपनी बहन को हर मुसीबत से बचाने के लिए कसमें खाता है. बहन भी अपने भाई की लंबी उम्र के लिए दुआएं करती है. लेकिन शायद ही आपने कभी ऐसा सुना होगा, जहां भाई-बहन शादी करते हैं।
लेकिन छत्तीसगढ़ में एक ऐसी जनजाति रहती है जहां भाई और बहन की शादी का रिवाज है. इस जनजाति के लोग आराम से भाई-बहनों की शादी करवा देते हैं. इस शादी को समाज से आशीर्वाद भी मिलता है. इसमें ज्यादातर चचेरे भाइयों से या फिर फुफेरे भाइयों से शादी करवाई जाती है. सबसे हैरानी की बात तो ये है कि अगर कोई शादी से इंकार करता है तो उसे सजा दी जाती।
आमतौर पर भाई-बहन की शादी को लोग गलत नजरिये से देखते हैं. एक ही आंगन में साथ पले-बढ़े भाई-बहन एक दूसरे के साथ खेलकर बड़े होते हैं. लेकिन छत्तीसगढ़ के धुरवा आदिवासी आगे चलकर भाई-बहनों की ही शादी करवा देते हैं. अगर चाचा अपने बेटे की शादी का रिश्ता लेकर आए और उसे ठुकरा दिया जाता है, तब सामने वाले पर जुर्माना लगाया जाता है।
अपने ही भाई-बहन में शादी के कई तरह के नुकसान भी देखने को मिलते हैं. जेनेटिक बीमारियां इस वजह से तेजी से बढ़ती है. साथ ही आने वाली पीढ़ियों पर भी इसका दुष्परिणाम देखने को मिलता है. इन सब ज्ञान के बाद अब इस जनजाति के युवा इस परंपरा से पीछे हट रहे हैं. कई लोग अपने पेरेंट्स से बगावत कर इस परंपरा को दरकिनार कर रहे हैं।
बता दें कि धुरवा जनजाति छत्तीसगढ़ के सबसे बड़ी जनजातियों में से एक है. यहां शादी में अग्नि नहीं बल्कि पानी को साक्षी मानकर फेरे लिए जाते हैं. धुरवा जनजाति आज के समय में छत्तीसगढ़ के अलावा ओडिशा के कुछ इलाकों में रहते हैं. इसकी बोली पारजी होती है लेकिन ते ओड़िया और छत्तीसगढ़ी भी बखूबी बोल लेते हैं।
इसके अलावा अब इस जनजाति के युवा हिंदी भी अच्छे से बोलने लगे हैं. छत्तीसगढ़ के धुरवा जनजाति के लोगों को अक्सर गोंद जनजाति में शामिल कर लिया जाता है लेकिन ओडिशा में इन्हें अलग जनजाति का दर्जा दिया जाता है।
Sors -News18
















