आखिर क्यों नही मिल रही है निजी स्कूलों को R T E की राशि , पिछले दो सालों से नही मिली है राशि , दो साल से राशि नही मिलने से स्कूलों की आर्थिक ब्यवस्था चरमराई ,,
छत्तीसगढ़ , 22-11-2020 6:23:35 PM
रायपुर 22 नवम्बर 2020 - RTE यानी राईट टू एजुकेशन के तहत निजी स्कूलों को समय पर
राशि का भुगतान नहीं हो पा रहा है। निजी स्कूलों को आरटीई की फीस देने के लिए जिला शिक्षा अधिकारियों को मई-जून में 30 करोड़ रुपये जारी किए गए थे इनमें अफसरों ने करीब 10 करोड़ रुपये रोककर रख दिया है।
इससे नाराज होकर लोक शिक्षण संचालनालय के अफसरों ने जिले के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई है। बताया जाता है कि अब आरटीई के तहत निजी स्कूलों को फीस अब उनके खाते में सीधे ट्रांसफर करने की तैयारी है। जल्द ही निजी स्कूलों को 100 करोड़ रुपये भुगतान करने की तैयारी है।
इस मामले में स्कूल शिक्षा के संचालक जितेंद्र शुक्ला का कहना है कि बच्चों के फीस की प्रतिपूर्ति निजी स्कूलों को सीधे आनलाइन देने के लिए व्यवस्था बनाने पर विचार किया जा रहा है। वहीं आरटीई के तहत स्कूलों में दाखिला के संबंध में आवश्यक प्रक्रिया करने के लिए सभी संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग और जिला शिक्षा अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। गौरतलब है कि प्रदेश में पहली से लेकर आठवीं तक आरटीई के तहत पौने तीन लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। सरकार पहली से पांचवीं तक प्रति छात्र सात हजार रुपये और छठवीं से आठवीं तक प्रति छात्र 11 हजार रुपये की फीस प्रतिपूर्ति देती है।
वर्तमान सत्र में कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए इज आफ डूइंग बिजनेस के तहत शासन द्वारा निर्णय लिया गया है कि दस्तावेजों की जांच विद्यालयों में ही की जाए। किसी छात्र के आवेदन में विवाद की स्थिति में ही नोडल अधिकारी जांच करें। इस संबंध में अपात्र किए गए आवेदनों की जांच नोडल अधिकारी स्वयं करें। ऐसे छात्र जिनके पालक विद्यालय नहीं पहुंच पाए उन प्रकरणों की समीक्षा भी नोडल अधिकारी द्वारा की जाए। इसके बाद पात्र पाए जाने पर दाखिले की कार्यवाई की जाए।
वर्ष 2020-21 से अंत्योदय कार्ड धारक एवं सामाजिक- आर्थिक जातिगत जनगणना वर्ष 2011 की सूची में नामों को पात्रता की श्रेणी में रखा जाए। पोर्टल में त्रुटि सुधार का विकल्प है, इसकी समीक्षा नोडल अधिकारी करें और पात्रता रखने वाले को दाखिला दिलाया जाए। आदेश में कहा गया है कि कुछ विद्यालय जो अब बंद हो चुके हैं, वहां भी सीटों का आवंटन किया गया था। ऐसी स्थिति में नोडल अधिकारी स्वयं उन पालकों से सम्पर्क स्थापित कर उनका आवेदन स्वीकार करते हुए उन्हें निकट के अन्य विद्यालय में दाखिला के लिए कार्यवाही करें।
लोक शिक्षण संचालनालय से अभी 100 करोड़ रुपये निजी स्कूलों के लिए आनलाइन ट्रांसफर हो रहा है। अभी जिला शिक्षा अधिकारियों को भेज दिया जाता था तो अधिकारी भुगतान नहीं करते हैं। 10 कमीशन लेने की शिकायत आम हो गई थी। कुछ जिलों में कुछ स्कूलों को 2017-18 और 2019-20 सत्र का भी पैसा नहीं मिला है और किसी स्कूल को पूरा मिल रहा है। इसमें जिले के शिक्षा अधिकारियों के खिलाफ कमीशन की शिकायत थी।














