पुलिस भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा कर धर्मेंद्र बना आरक्षक , ड्यूटी के दौरान ऐसे खुला राज
मध्य प्रदेश , 14-11-2024 7:02:54 AM
भोपाल 14 नवम्बर 2024 - विशेष न्यायाधीश (व्यापमं प्रकरण) नीतिराज सिंह सिसोदिया की न्यायालय ने बुधवार को व्यापमं घोटाले के एक मामले में आरोपी धर्मेंद्र शर्मा को दोपसिद्ध पाकर सात-सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड भी दिया है।
विशेष लोक अभियोजक सुनील श्रीवास्तव ने बताया कि व्यापमं द्वारा आयोजित पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा वर्ष 2013 में मुरैना के धर्मेंद्र शर्मा पिता महावीर शर्मा का चयन हुआ था। शिकायत मिली थी कि उसने अपनी जगह साल्वर ( मुन्ना भाई) को बैठाकर परीक्षा उत्तीर्ण की थी। STF की जांच में शिकायत सही पाए जाने पर आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।
आरोपी आरक्षक धर्मेंद्र शर्मा चयन परीक्षा (प्रथम) में भी फर्जी तरीके से शामिल हुआ था, पर उसका चयन नहीं हुआ था। इसके बाद आरक्षक चयन परीक्षा वर्ष 2013 (द्वितीय) में आरोपित दोबारा फर्जी तरीके से शामिल हुआ और आरक्षक के पद पर चयनित हुआ। वर्तमान में इंदौर में पदस्थ था। STF ने उसे वहीं से गिरफ्तार किया है। विवेचना के बाद साक्षियों के बयान और तथ्यों के आधार पर आरोपी का दोनों परीक्षाओं में दोषी होना पाया गया।

















