छत्तीसगढ़ - मौत के बाद बैंक प्रबंधक के माथे से मिटा कलंक का टीका , पति को इंसाफ दिलाने पत्नी ने 22 साल तक लड़ी कानूनी लड़ाई
बिलासपुर , 03-09-2024 7:44:01 PM
बिलासपुर 03 सितंबर 2024 - मौत के बाद बैंक प्रबंधक राजेन्द्र यादव रिश्वत लेने के आरोप से मुक्त हुए. 22 साल तक चले मामले में बैंक प्रबंधक की पत्नी ने बेटों के साथ हाईकोर्ट में केस लड़ा और जीत हासिल की. बैंक प्रबंधक पर शासकीय योजना के तहत बोरवेल खुदाई के लिए लोन देने के एवज में रिश्वत लेने का आरोप था।
दरअसल, दुर्ग निवासी राजेन्द्र कुमार यादव वर्ष 2000 -01 में कृषि एवं भूमि विकास बैंक के बेमेतरा शाखा में शाखा प्रबंधक के पद पर कार्यरत थे. इस दौरान ग्राम एरमसाही नवागढ़ ब्लॉक निवासी किसान धीरेन्द्र कुमार शुक्ला ने शाखा प्रबंधक राजेन्द्र यादव द्बारा रिश्वत मांगे जाने की लोकायुक्त रायपुर में शिकायत की।
शिकायत पर लोकायुक्त ने मई 2001 को शिकायत कर्ता को केमिकल लगे करेंसी लेकर बैंक प्रबंधक के पास भेजा और ट्रेप कर शाखा प्रबंधक को हिरासत में लिया. इस मामले में विशेष न्यायाधीश ने जनवरी 2003 को शाखा प्रबंधक को भ्रष्ट्राचार निवारण अधिनियम की धारा 7 में छः माह कैद 500 रूपये अर्थदंड एवं धारा 13 (डी) 1 में एक वर्ष कैद एवं 500 अर्थदंड की सजा दी।
शाखा प्रबंधक ने इस निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की. अपील लंबित रहने के दौरान अपील कर्ता शाखा प्रबंधक की मौत हो गई. पति की मौत के बाद पत्नी उतम कुमारी यादव ने अपने पुत्र प्रशांत यादव व निशांत यादव के साथ मिलकर मुकदमा को आगे बढ़ाया. 22 वर्ष बाद अगस्त में अपील पर हाईकोर्ट में अंतिम सुनवाई हुई. हाईकोर्ट ने मामले में पाया कि शिकायत कर्ता ने अपील कर्ता को 526 रुपए प्रोसेस शुल्क दिया था. ट्रेप टीम ने उसके जेब से 100-100 के चार करेंसी नोट जब्त करने की बात कही।
सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि अपील कर्ता के जेब से टीम ने 7-8 करेंसी नोट निकाला था. रिश्वत में दिए गए नोट के नंबर भी दर्ज नहीं है. वही अपील कर्ता ने बचाव में कहा कि शिकायत कर्ता ने प्रोसेस शुल्क दिया था, जिसकी उसे रसीद भी दी गई थी. मामले में उक्त रसीद को भी प्रस्तुत किया गया. हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद बैंक प्रबंधक को रिश्वत लेने के आरोप से मुक्त करते हुए निचली अदालत के फैसले को खारिज कर दिया है।
















