सियासी पलटी मारने में माहिर नीतीश के सहारे NDA की नैया , जाने नीतीश ने कब-कब मारी पलटी
नई दिल्ली , 06-06-2024 7:48:15 AM
नई दिल्ली 06 जून 2024 - लोकसभा चुनाव 2024 की तस्वीर साफ हो चुकी है. बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए को बहुमत का आंकड़ा जरूर मिल गया है, लेकिन बीजेपी अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है. इस बीच सबसे ज्यादा चर्चा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की हो रही है, जो सियासी पलटी मारने के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं. ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि बीजेपी भले ही अपने सहयोगी दलों के सहारे सरकार बना ले, लेकिन नीतीश कुमार जैसे नेताओं के सहारे एनडीए की नाव कैसे पार होगी?
नीतीश कुमार की राजनीति को देखते हुए कब क्या फैसला लेंगे, इसका कयास लगाना बहुमत मुश्किल है. नीतीश कुमार बिहार की सियासत में दो दशक से राजनीतिक धुरी बने हुए हैं. वो अपनी सुविधा के अनुसार जब चाहते हैं बीजेपी के साथ हाथ मिलाकर सरकार बना लेते हैं और जब चाहते हैं साथ छोड़कर कांग्रेस-आरजेडी की नाव पर सवार हो जाते हैं।
सत्तर के दशक में जनता पार्टी के साथ सियासी पारी शुरू करने वाले नीतीश कुमार को सियासी बैलेंस बनाकर चलने वाला नेता कहा जाता है. बीजेपी के साथ रहते हुए भी विपक्षी दलों के चहेते बने रहे. इसी का नतीजा है कि जब चाहते हैं, वो इधर से उधर और उधर से इधर सियासी पाला बदलते रहते हैं.
नीतीश-लालू की जोड़ी ने किया था बीजेपी का सफाया..
नीतीश कुमार ने 1998 में बीजेपी के साथ दोस्ती की थी, जो 2013 तक जारी रही. 2014 में बीजेपी ने नरेंद्र मोदी के नाम को प्रधानमंत्री पद के लिए आगे बढ़ाया तो नीतीश कुमार ने एनडीए से नाता तोड़ लिया था. नीतीश कुमार ने बीजेपी से अलग होने के बाद आरजेडी के प्रमुख लालू प्रसाद यादव और कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लिया और बिहार में 2015 विधानसभा का चुनाव लड़े थे. नीतीश-लालू यादव की जोड़ी ने बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी का सफाया कर दिया था. महागठबंधन की सरकार बनी, नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने तो तेजस्वी यादव ने डिप्टी सीएम की कुर्सी संभाली।
2017 में नीतीश कुमार का अचानक मन बदला और उन्होंने सियासी पलटी मारी. जेडीयू ने आरजेडी - कांग्रेस के साथ गठबंधन तोड़कर बीजेपी के साथ हाथ मिलाकर सरकार बना ली. नीतीश ने 2020 का विधानसभा चुनाव बीजेपी के साथ मिलकर लड़े, लेकिन बिहार में दो साल सरकार चलाने के बाद 2022 में फिर सियासी पलटी मारी. नीतीश ने एक बार फिर से बीजेपी के साथ दोस्ती तोड़ दी और कांग्रेस- आरजेडी और लेफ्ट पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बना लिया।
नीतीश कुमार ने सियासी पाला बदलने के बाद नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने का बीड़ा उठाया. नीतीश कुमार ही वो नेता हैं, जिन्होंने इंडिया गठबंधन की नींव रखी थी. शुरुआत में नीतीश कुमार देश में घूम-घूम कर विपक्षी दलों को एकजुट करने में लगे थे. इंडिया गठबंधन की पहली बैठक नीतीश कुमार की मेजबानी में पटना में हुई थी, लेकिन बाद में लोकसभा चुनाव के ठीक पहले उन्होंने फिर से अपना पाला बदल दिया. इंडिया गठबंधन का साथ छोड़कर बीजेपी के साथ हाथ मिला लिया और एनडीए का हिस्सा बन गए।
2024 के लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार एनडीए गठबंधन में रहते हुए चुनाव लड़े और उनके 10 सांसद जीतने में सफल रहे हैं. बीजेपी को अपने दम पर पूर्ण बहुमत न मिलने के चलते नीतीश कुमार की भूमिका काफी अहम हो गई है. एनडीए के साथ रहते हैं तो बीजेपी के लिए सियासी मुफीद होंगे, लेकिन पलटी मारते हैं तो फिर इंडिया गठबंधन के लिए संजीवनी से कम नहीं है।
ऐसे में बीजेपी बैसाखी के सहारे भले ही सरकार बना ले, लेकिन नीतीश कुमार जैसे नेता कब गच्चा दें देंगे यह कहना मुश्किल है. सियासी पलटी मारने के माहिर नीतीश कुमार जैसे नेताओं के सहारे एनडीए की सियासी नैया कैसे पार होगी?
















