लिव इन पार्टनर के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए कैदी ने मांगी पैरोल , जज ने दिया यह फैसला
नई दिल्ली , 14-05-2024 7:39:14 AM
नई दिल्ली 14 मई 2024 - लिव-इन पार्टनर के साथ सेक्स को लेकर आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक कैदी ने पैरोल के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है पर कोर्ट ने उसे पैरोल देने से इनकार कर दिया. आरोपी शख्स ने कोर्ट में अपनी लिव-इन पार्टनर को पत्नी के रूप में पेश करने की कोशिश की. उसने इस बात को छिपाया कि उसकी पहले से भी एक पत्नी है।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि भारतीय कानून किसी कैदी को पत्नी से ‘वैवाहिक संबंध’ बनाए रखने के आधार पर पैरोल देने की अनुमति नहीं देता तो लिव-इन पार्टनर की बात ही छोड़िए।
अदालत ने कहा कि कोई व्यक्ति जो किसी मामले में दोषी है वो अपने साथ रहने वाली लिव इन पार्टनर से बच्चे पाने का मौलिक अधिकार का दावा नहीं कर सकता. उन्होंने कहा कि कानून वैवाहिक संबंध बनाए रखने के आधार पर पैरोल देने की अनुमति नहीं देता है, वह भी लिव-इन पार्टनर के साथ तो बिल्कुल नहीं. अगर कोई दोषी है और उसकी कानूनी रूप से विवाहित पत्नी पहले से जीवित है और उनके बच्चे हैं तो वह जरूरी नियमों के मापदंडों के भीतर अपने लिव-इन-पार्टनर से बच्चा पैदा करने का मौलिक अधिकार होने का दावा नहीं कर सकता।
कोर्ट ने कहा कि अगर इस तरह के आधार पर पैरोल दी जाती है तो इससे ऐसी याचिकाओं की बाढ़ आ जाएगी. इसे आधार बनाकर कई दोषी पैरोल की मांग कर सकते हैं कि उनके पास अपने कानूनी रूप से विवाहित साथी के अलावा एक लिव-इन पार्टनर है।
















