छत्तीसगढ़ में हो रहा है PG दवाओं का जम कर खेल , अगर आप दवा खरीदते है तो बरते सावधानी ,,
छत्तीसगढ़ , 13-07-2020 11:09:36 PM
साल 1982 से 1994 तक कैडिला , फ्रेंको इंडिया , सिपला , ल्युपिन , साराभाई , जैसी कुछ नामी गिरामी कंपनियों की ही दवाईया नजर आती थी लेकिन अब तो ना जाने कितनी ऐसी कंपनियां दवा ब्यवसाय में लग गई है जिन्हें गिनते गिनते थक जाएंगे लेकिन गिनती खत्म नही होगी ।
अब तो मरीज या उनके परिजनों को यह भी पता नही चलता है की वो जो दवा अपनी खून पसीने की गाढ़ी कमाई से खरीद रहे है वो असली है या नकली ।
कुकुरमुत्ते की तरह उग आए दवा कंपनियां अपने MR यानी मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के जरिये बड़े बड़े हॉस्पिटलों में जा कर सर्जन या फिर हॉस्पिटल के संचालक से सौदा करते है और सौदा पट जाने पर डॉक्टर उन्ही दवाओं को लिखते है जिसका सौदा हो चुका होता है ।
खास बात यह की यह दवाएं उन्ही दुकानो पर उपलब्ध होता है जो दुकानदार डॉक्टरों को एक्स्ट्रा कमिसन देते है ।
छत्तीसगढ़ के लोग अब तक ना तो नसबंदी काण्ड को भूले होंगे और ना ही आँख फोडवा मामले पर धूल जमी है इन दोनों काण्ड के बाद भी PG दवाओं का खेल बदस्तूर जारी है ।
PG वाली दवाईयों का खेल बड़ा लंबा है , यह खबर तो एक शुरुआत भर है , इस मामले में जो भी अपडेट आते रहेगी News 24/7 आपको अपडेट करते रहेगा ।














