छत्तीसगढ़ - भाजपा से चार और कांग्रेस से पांच डाक्टर चुनावी मैदान में , रमन , रेणु सहित इन्हें मिला मौका , देखे नाम
रायपुर , 29-10-2023 12:42:35 AM
रायपुर 28 अक्टूबर 2023 - विधानसभा चुनाव में इस बार कांग्रेस , भाजपा समेत अन्य राजनीतिक दलों को मिलाकर प्रोफेशनल 11 डाक्टर मैदान में हैं। इनमें कांग्रेस से पांच , भाजपा से चार , आम आदमी पार्टी और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ से एक-एक डाक्टर शामिल हैं।
वहीं, वर्ष-2018 के विधानसभा चुनाव को देखें तो 35 डाक्टर (MBBS , BAMS और PHD) वाले चुनाव मैदान में थे। इनमें कांग्रेस से सात , भाजपा से चार , निर्दलीय आठ , आम आदमी पार्टी से चार व 12 अन्य क्षेत्रीय पार्टियों के शामिल थे। इनमें 10 डाक्टर विजयी हुए थे और 25 को हार का सामना करना पड़ा था।
भाजपा ने राजनांदगांव से लगातार तीन बार के विधायक और 15 वर्षों तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे डाक्टर रमन सिंह को चौथी बार मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने डा. शिवकुमार डहरिया को भी चुनावी मैदान में चौथी बार उतारा है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ की डा. रेणु जोगी MBBS, MS (नेत्र रोग विशेषज्ञ) हैं।
आम आदमी पार्टी की डा उज्जवला कराड़े स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं जो बिलासपुर से प्रत्याशी बनीं हैं। ऐसे ही भाजपा की टिकट पर मस्तुरी से डा. कृष्णमूर्ति बांधी , बिलाईगढ़ से डा. दिनेश लाल जांगड़े और सक्ती से डा. खिलावन साहू चुनाव लड़ रहे हैं। महासमुंद से डा रश्मि चंद्राकर , आरंग से शिवकुमार डहरिया , रामानुजगंज से डा. अजय तिर्की , लुंड्रा से डा. प्रीतम राम और मरवाही से डा. केके ध्रुव कांग्रेस के चिह्न पर चुनावी मैदान में ताल ठोका है।
प्रदेश के कई ऐसे डाक्टर हैं, जिन्होंने राजनीति में अपनी पहचान बनाते हुए विधानसभा तक का सफर तय किया है। इनमें डाक्टर रमन सिंह, डा. शिवकुमार डहरिया, डा रेणु जोगी, डा प्रीतम राम प्रमुख हैं, जो अभी भी राजनीति में पूरी तरह से सक्रिय हैं। विधायक कृष्णमूर्ति बांधी सबसे पहले वर्ष-2003 में विधायक बने थे। जिसके बाद 2008 एवं 2018 में विधायक बने।
सरगुजा संभाग की प्रतापपुर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर आए डा प्रेमसाय सिंह को भूपेश कैबिनेट में मंत्री का पद मिला था। डा प्रेमसाय सिंह राजनीति में आने से पहले सरकारी डाक्टर के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने आयुर्वेदिक डाक्टर की डिग्री ली है। राज्य गठन के बाद अजीत जोगी के नेतृत्व में बनी कांग्रेस की सरकार में भी वे मंत्री पद पर थे। हालांकि, इस बार कांग्रेस से टिकट नहीं मिल पाया है। रैंगिग के चलते मेडिकल कालेज छोड़ कर वापस आने वाले विनय जायसवाल ने पिता की समझाइश पर वापस जाकर डाक्टरी की पढ़ाई पूरी की।















