सक्ती पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में, जिस सटोरिये को बचाने के लिए रचा प्रपंच उसे हुआ जेल
सक्ती 08 मई 2026 - सक्ती जिला मुख्यालय में कुछ दिन पूर्व हुए सिलसिलेवार ऑनलाइन सट्टा के खिलाफ हुई पुलिस की कार्यवाही संदेह के दायरे में है और इसके पीछे वजह यह है कि सक्ती पुलिस ने 05 सटोरियों का नाम और तश्वीर प्रेस विज्ञप्ति के जरिये उजागर तो कर दिया लेकिन छठवें सटोरिये चिराग केशरवानी की गिरफ्तारी को छिपा दिया।
इस मामले मे गौर करने वाली बात यह है सभी पांचों सटोरियों को जमानत मिल गई लेकिन पुलिस ने जिस छठवें सटोरिया का नाम मीडिया से छिपाया उसकी जमानत कोर्ट ने खारिज कर उसे जेल भेज दिया।
हम बात कर रहे है शिवरीनारायण निवासी चिराग केसरवानी की जो भूपेंद्र राठौर से आईडी खरीद कर ऑनलाइन सट्टा का संचालन कर रहा था जिसे सक्ती पुलिस और साइबर सेल ने 03 मई 2026 को गिरफ्तार कर 04 मई को कोर्ट मे पेश किया।
दरअसल सहायक जिला अभियोजन अधिकारी अरविंद कुमारजायसवाल ने न्यायालय को बताया कि आरोपी चिराग केशरवानी के खिलाफ पूर्व में भी जुआ एक्ट के तहत कार्रवाई हो चुकी है। इसी आधार पर अभियोजन ने जमानत आवेदन निरस्त करने की मांग की। जिस पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) न्यायालय ने आरोपी चिराग केशरवानी का जमानत याचिका खारिज कर उसे जेल भेज दिया।
मजे की बात यह है कि जिस सटोरिया चिराग केशरवानी का नाम पुलिस ने छिपाया और कोर्ट ने जिसे जेल भेजा वो चिराग केशरवानी सत्ताधारी पार्टी भाजपा युवा मोर्चा का जिला महामंत्री है। इसका मतलब साफ है कि सक्ती पुलिस सटोरिया चिराग केशरवानी को बचाने के लिए पुरजोर कोशिश की लेकिन सहायक जिला अभियोजन अधिकारी अरविंद कुमार जायसवाल की तेज दलील ने पुलिस के किये कराए पर पानी फेर दिया।
हमे यह बताने में कोई झिझक नही है कि चिराग केशरवानी की गिरफ्तारी के खबर की भनक हमे भी नही लगी लेकिन जब SNN 24 के खोजी पत्रकार प्रदीप शर्मा ने इस मामले को उठाया तब जाकर इस मामले से पर्दा उठा नही तो सब जय जोहार था।















