कोरोना काल ने क्या दिन दिखाया , बस एजेंट बने कलमवीर , और कलमकार बने मूक दर्शक
जांजगीर चाम्पा , 24/07/2024 5:03:04 AM
सक्ती 26 अप्रैल 2021 - कोरोना काल मे सब परेशान है चाहे वो आम लोग हो या खास लोग।
बड़े और पैसे वाले रसूखदार लोग अपने निजी A/C वाहनों में सुगमता के साथ सफर कर रहे है लेकिन निचले तबके के लोगो के पास बस , टैक्सी ,ऑटो के अलावा कोई साधन नही है।
बस संचालन बन्द होने से बस मालिक , ड्राइवर , कंडक्टर , हेल्फर के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है वही बसों की दलाली कर दस - दस रुपये वसूलने वाले अपना ब्यवसाय बदल कर कलमकार बन गए है।
अब आलम यह है कि बस एजेंट से कलमवीर बने कथित पत्रकार संगठन में शामिल हो गए है , चाहे वह पुलिस विभाग की प्रेस कांफ्रेंस हो या फिर कोई अन्य कांफ्रेंस हो पहली पंक्ति घंटो पहले पहुँच कर आसन जमा लेते है।
इतना ही नही अपनी रौब जमाने के लिए ऐसे ऐसे सवाल करते है जिससे वरिष्ठ पत्रकार तक को भी शर्म आ जाती है।
अब ऐसे में कौन कहता है की कोरोना काल आफत है सरकार से अनुरोध है की बसों का संचालन जल्द शुरू करे जिससे यह कलमवीर फिर से पुराने ब्यवसाय में आये और पत्रकारों को सम्मान के साथ उनकी असली जगह मिल सके।
ये तो कोरोना काल है आज नही तो कल खत्म हो जाएगा लेकिन पुरानी यादों को भूलने की कोशिश करना गलतफहमी है जो समय कल मेरा था तो आज तेरा है लेकिन कल फिर मेरे समय का बारी आएगी और मैं वही खड़ा मिलूंगा यह तो चक्र है ये घूमते ही रहेगा बस याद रखना।
















