छत्तीसगढ़ - बदले जा सकते है जांजगीर चाम्पा सहित कई लोकसभा के प्रत्याशी , अभी किसी की टिकट नही है फायनल
रायपुर , 15-03-2024 7:29:50 AM
रायपुर 15 मार्च 2024 - देश में संसद से लेकर पंचायत तक कई चुनाव होते हैं। इन चुनावों के दौरान आप अक्सर बी- फॉर्म का नाम सुनते होंगे। कई बार आपके मन में सवाल भी उठता होगा कि आखिर यह बी- फॉर्म होता क्या है। दरअसल, बी-फॉर्म इस बात का सबूत देता है कि उम्मीदवार किसी राजनीतिक दल द्वारा खड़ा किया गया है या स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रहा है। और यह सुनिश्चित करता है कि उम्मीदवार को पार्टी का आरक्षित प्रतीक आवंटित किया जाए या नही।
एक उम्मीदवार को स्वतंत्र माना जाएगा और उसे पार्टी का आरक्षित प्रतीक आवंटित नहीं किया जाएगा जब तक कि उसका नाम बी-फॉर्म में इंगित न किया गया हो। इसलिए बी-फॉर्म को बहुत अधिक महत्व दिया जाता है और यह अक्सर विद्रोहियों आदि से बचने के लिए अंतिम समय पर दिया जाता है।
फॉर्म बी से जुड़ा अविभाजित मध्य प्रदेश के दौर का एक किस्सा आपको बताते हैं। यह बात 1998 के विधानसभा चुनाव की है। तब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे। कांग्रेस ने बिलासपुर से पहले अनिल टाह को प्रत्याशी घोषित किया था। उनके नाम का फॉर्म बी जारी हो गया था, लेकिन नामांकन के ठीक पहले पार्टी ने प्रत्याशी बदल दिया। पार्टी ने किशन कुमार यादव (राजू यादव) को प्रत्याशी बना दिया गया। नामांकन जमा करने की समय सीमा खत्म हो रही थी, ऐसे में विशेष विमान से किशन यादव के नाम का बी फॉर्म बिलासपुर पहुंचाया गया।
इसलिए जब तक प्रत्याशियों का बी-फार्म नामांकन के दौरान जमा नही जाता तब तक प्रत्याशियों के बदले जाने की आशंका बनी रहती है।
















