छत्तीसगढ़ में आटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली , एक साथ एक से अधिक ट्रेनें दौड़ रही है पटरी पर
रायपुर , 13-06-2023 12:17:51 AM
रायपुर 12 जून 2023 - दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे निरंतर ही आधुनिक और सुविधायुक्त तकनीकी का उपयोग कर यात्री सुविधाओं के साथ अधिक से अधिक ट्रैफिक के लिए प्रयासरत है। इस आधुनिक व उन्नत तकनीक के तहत ट्रेनों की बेहतर परिचालन को लेकर परंपरागत सिग्नलिंग सिस्टम को अपग्रेड कर आटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम में परिवर्तित किया जा रहा है।
रायपुर रेल मंडल के अधिकारियों ने बताया कि आटो सिग्नलिंग व्यवस्था बिना किसी अतिरिक्त स्टेशनों के निर्माण और रखरखाव के साथ ही ज्यादा से ज्यादा ट्रेन चलाने को प्रमुख जंक्शन स्टेशन के ट्रैफिक को नियंत्रित करने में मदद करता है। आटोमेटिक सिग्नल सिस्टम लगने से ट्रेनों को बेवजह कहीं भी खड़ा नहीं होना पड़ेगा। इसके चलते एक ही रूट पर एक के पीछे एक ट्रेन बिना लेट हुए आसानी से चल सकेगी। इसके साथ ही इसके कई लाभ हैं। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में नागपुर से दुर्ग तक ट्रेनों की सेक्शनल रफ्तार बढ़ाकर राजधानी रूट के समकक्ष 130 किलो मीटर प्रतिघंटा की जा चुकी है।
ट्रेनों की रफ्तार के साथ ही संख्या भी बढ़ेगी
आटोमेटिक सिग्नल से रेल लाइनों पर ट्रेनों की रफ्तार के साथ ही संख्या भी बढ़ सकेगी। वहीं कहीं भी खड़ी ट्रेन को निकलने के लिए आगे चल रही ट्रेन के अगले स्टेशन तक पहुंचने का भी इंतजार नहीं करना पड़ेगा। स्टेशन यार्ड से ट्रेन के आगे बढ़ते ही ग्रीन सिग्नल मिल जाएगा। यानी एक ब्लाक सेक्शन में एक के पीछे दूसरी ट्रेन सिग्नल के सहारे ट्रेनें एक-दूसरे के पीछे चलती रहेंगी। अगर आगे वाले सिग्नल में तकनीकी खामी आती है तो पीछे चल रही ट्रेनों को भी सूचना मिल जाएगी, जो ट्रेन जहां रहेंगी, वहीं रुक जाएंगी। पहले जहां दो स्टेशनों के बीच एक ही ट्रेन चल सकती थी वहीं आटो सिग्नलिंग के द्वारा दो स्टेशन की बीच दूरी के अनुसार दो, तीन या चार ट्रेने भी आ सकती है।
सात से आठ मिनट में ही दूसरी ट्रेन चलाई जा सकेगी
औसतन एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन के बीच की दूरी 12 से 15 किलोमीटर तक होती है। ट्रेन को यह दूरी तय करने में 15 मिनट का समय लगता है। पहले गई ट्रेन के पीछे 15 मिनट के बाद दूसरी ट्रेन चलाई जाती है। रेलवे इस समय को कम कर सात से आठ मिनट करने जा रहा है। जिससे वर्तमान समय में चलने वाली ट्रेन दोगुनी ट्रेनें चलाई जा सकें। रेलवे इसके लिए दो स्टेशन के बीच आटोमेटिक सिग्नल सिस्टनम लगाने जा रहा है। बीच के सिग्नल को पार करते ही पीछे से दूसरी ट्रेन चला दी जाएगी। इससे 15 मिनट के स्थान पर सात से आठ मिनट में ही दूसरी ट्रेन चलाई जा सकती है।
दक्षिण पूर्व मध्य रेल्वे के कलमना से दुर्ग (265 किमी), जयरामनगर , बिलासपुर , बिल्हा (32 किमी) और बिलासपुर - घुटकू (16 किमी) सेक्शन में आटो सिग्नलिंग प्रणाली अपनाया जा चुका है। निकट भविष्य में चांपा से गेवरारोड , जयरामनगर से अकलतरा और बिल्हा से निपनिया तक आटो सिग्नलिंग का प्राविधान किया जाएगा। उपलब्ध संसाधनों के आधार पर परंपरागत सिग्नलिंग सिस्टम , ट्रेन परिचालन के एबस्ल्युट ब्लाक सिस्टम के स्थान पर विभिन्न सेक्शन में आटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम लागू करने का काम तेज गति से किया जा रहा है।
















