CM भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में खेला ऐसा दांव जिसकी काट तलाशने में भाजपा का छूट रहा है पसीना
रायपुर , 06-06-2023 3:18:38 PM
रायपुर 06 जून 2023 - छत्तीसगढ़ में गाय , गोबर , राम और रामायण की राजनीति के बाद पुरखों के नाम पर सियासत शुरू हो गई है। आदिवासी सम्मान के नाम पर भाजपा पुरखौती यात्रा निकाल रही है, तो कांग्रेस की तरफ से मोर्चा आदिवासी नेता नंदकुमार साय ने संभाला है। भाजपा के वरिष्ठ आदिवासी नेता रहे साय अब कांग्रेस के पाले में है और भाजपा के 15 साल के कार्यकाल में आदिवासियों के अपमान का मुद्दा लेकर जनता के बीच जा रहे हैं।
भाजपा के कार्यकाल में भवनों और योजनाओं के नामकरण को लेकर भी कांग्रेस सवाल कर रही है। इसमें बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी नायकों की जगह भाजपा के पितृ पुरुषों के नाम पर योजनाएं शुरू की गई। चुनाव साल में यह राजनीति इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि मुख्यमंत्री बघेल ने छत्तीसगढ़िया कार्ड चला है।
प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान को मुद्दा बनाकर काम शुरू हुआ था। मुख्यमंत्री निवास में हरेली , राजधानी में राष्ट्रीय आदिवासी महोत्सव , छत्तीसगढ़िया खेलों को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़िया ओलंपिक शुरू किया गया। कांग्रेस सरकार ने भवनों का नामकरण भी छत्तीसगढ़ के महापुरुषों के नाम पर शुरू किया। कांग्रेस की इस मुहिम में जब भाजपा पिछड़ती नजर आने लगी तो चुनाव में छह महीना पहले पुरखौती सम्मान यात्रा निकालने का फैसला किया गया। यह यात्रा प्रदेश के चारों कोनों से महापुरुषों की जन्म स्थली से शुरू की जाएगी।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की संस्कृति और छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान को लेकर चलाए जा रहे अभियान की काट भाजपा के पास नजर नहीं आ रही है। मजदूर दिवस पर बोरे-बासी खाकर मुख्यमंत्री ने एक नए वर्ग काे साधने की कोशिश की है।
कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश की संस्कृति को संरक्षित करने के लिए जितने भी अभियान चलाए भाजपा ने उसका विरोध किया। जब भाजपा सरकार में थी, तब सरकारी भवनों का नाम भाजपा के पितृ पुरुष दीनदयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर रखा गया। अब जनता को गुमराह करने के लिए पुरखौती यात्रा निकाली जा रही है।
















