कोरोना वायरस को लेकर नया प्रयोग , वैज्ञानिकों का दावा इस तरह से खत्म किया जा सकता है कोरोना का वायरस
देश , 19-03-2021 11:09:00 AM
नई दिल्ली 19 मार्च 2021 - कोरोना वायरस का कहर कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इससे लड़ने के लिए वैक्सीनेशन अभियान के बावजूद संक्रमण बढ़ रहा है। यहां तक की इसका दूसरा स्ट्रेन भी सामने आया है। इस बीच कोविड-19 पर एक नई रिसर्च रिपोर्ट समाने आई है।
मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआइटी) के एक शोध अध्ययन से पता चला है चिकित्सीय जांच में इस्तेमाल होने वाले अल्ट्रासाउंड से कोरोना को खत्म किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने अल्ट्रासाउंड फ्रीक्वेंसी की एक रेंज में वाइब्रेशन के लिए कोविड-19 की मैकेनिकल रिस्पांस मॉडल तैयार किया है। उन्होंने पाया कि 25 से 100 मेगाहर्ट्ज के बीच वाइब्रेशन ने संक्रमण के शेल और स्पाइक्स को खत्म कर दिया और एक मिलीसेकंड के कुछ हिस्सों में ही उसका टूटना शुरू हो गया।
जर्नल ऑफ मैकेनिक्स एंड फिजिक्स ऑफ सॉलिड्स में प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका प्रभाव हवा और पानी दोनों में देखने को मिला है। टीम ने कहा कि इसके निष्कर्ष कोरोना वायरस की रेंज के लिए एक संभावित अल्ट्रासाउंड आधारित इलाज का पहला संकेत है। इसमें सार्स-कोविड-2 वायरस भी शामिल है।
एमआईटी में एप्लाइड मैकेनिक्स के प्रोफेसर टोमाज विर्जबिकी ने कहा कि हमने साबित कर दिया है कि अल्ट्रासाउंड वाइब्रेशन के तहत कोरोना वायरस शेल और स्पाइक कंपन करेंगे। उस कंपन का असर इतना ज्यादा होगा कि उससे पैदा होने वाला खिंचाव वायरस के कुछ हिस्सों को तोड़ सकता हैं।
उन्होंने कहा, 'शुरुआती परिणाम वायरस के भौतिक गुणों के बारे में सीमित आंकड़ों पर आधारित हैं।' अभी इस बात की जांच होनी बाकी है कि अल्ट्रासाउंड कैसे किया जा सकता है। हमें उम्मीद है कि हमारे रिसर्च से विभिन्न संकायों में एक बहस शुरू होगी।
शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में सिमुलेशन में ध्वनि कंपन पैदा कर यह परखने का प्रयास किया कि अल्ट्रासाउंड का रेंज वाला कंपन किस प्रकार से कोरोना वायरस की संरचना को प्रभावित करता है। उन्होंने वायरस के ज्ञात भौतिक गुणों के आधार पर यह अनुमान लगाया कि वायरस के आवरण का प्राकृतिक कंपन 100 मेगाहर्ट्ज होगा।
हालांकि प्रयोग की शुरुआत में कोरोना वायरस के प्राकृतिक कंपन का पता ही नहीं चला। मिलीसेकंड से भी कम समय में बाहरी कंपन वायरस के प्राकृतिक कंपन के साथ प्रतिध्वनित होने लगा और उसके परिणाम स्वरूप आवरण और स्पाइक अंदर ओर इस प्रकार से मुड़ने लगा जैसे कि जमीन पर पटके जाने पर गेंद में होता है। इसके बाद जब तीव्रता बढ़ाई गई तो पाया गया कि उसकी गूंज से आवरण टूट सकता है। कम फ्रीक्वेंसी यथा 25 और 50 मेगाहर्ट्ज से तो वायरस का टूटना और भी तेज हो गया। यह प्रयोग हवा और पानी के सिमुलेटेड वातावरण में किया गया, जो शरीर में पाए जाने वाले तरल के घनत्व के बराबर था।














