कलेक्टर SDM और डिप्टी कलेक्टर का कर सकता है ट्रांसफर लेकिन क्लर्क का नही , जाने ऐसा क्यों??
रायपुर , 22-04-2024 8:01:28 PM
रायपुर 22 अप्रैल 2024 - कलेक्टर शब्द की उत्पति टैक्स कोलेक्शन से हुई है। याने टैक्स कलेक्ट करने वाले पद को कलेक्टर नाम दिया गया। दरअसल, पुराने जमाने में सरकार के पास पैसे होते नहीं थे, सो विभाग भी नहीं थे। न कोई खास योजनाएं होती थी। सड़क, स्कूल, अस्पताल बन गया तो काफी था। आम आदमी से लगान के नाम पर जो टैक्स लिया जाता था, सरकार की आमदनी का यही मुख्य जरिया था। लगान से ही सरकार का संचालन किया जाता था।
लिहाजा, अंग्रेजों के दौर से पहले 1772 में कलेक्टर पद क्रियेट किया गया। मगर 60 के दशक के बाद इसका स्वरुप बदला। योजनाएं बननी शुरू हुई, कल -कारखानों का दौर शुरू हुआ। उससे सरकार के खजाने में पैसे आने भी प्रारंभ हुए। फिर विभाग भी बढ़ते गए। अब राज्यों में छोटे-बड़े ढाई दर्जन से अधिक विभाग होते हैं। और जो विभाग राज्य में होते हैं, उसके सारे जिला स्तर के विभाग में जिलों में होते हैं। और कलेक्टर इसके सुपरविजन करते हैं।
भू-राजस्व संहिता में कलेक्टरों को SDM की पोस्टिंग, ट्रांसफर का अधिकार दिया गया है तभी SDM की पोस्टिंग कलेक्टर करते हैं। सरकार सिर्फ डिप्टी कलेक्टरों का जिलों में ट्रांसफर करती है। उनमें से किसको तहसीलों में SDM बनाना है और किससे कलेक्ट्रेट में काम लेना है, यह अधिकार कलेक्टरों को दिया गया है।
सरकार किसी भी सूरत में SDM की पोस्टिंग नहीं कर सकती। हालांकि, कलेक्टर किसी बाबू का ट्रांसफर नहीं कर सकता। क्योंकि, ट्रांसफर का मसला सरकार के अंतगर्त आता है। सरकार ही इस पर निर्णय ले सकती है। मगर भू-राजस्व संहिता में प्रदत्त अधिकारों के तहत कलेक्टरों को SDM ट्रांसफर का अधिकार मिला हुआ है।
















